Highlights
- About the Story/Aarti
- Spiritual Benefits
- Author's Note

आरती कुंजबिहारी की (Hindi Lyrics)
By Harshita Saini
Published: May 14, 2026
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला। श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला। गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली। लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ ॥ आरती कुंजबिहारी की...॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं। गगन सों सुमन रासि बरसै। बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग, अतुल रति गोप कुमारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ ॥ आरती कुंजबिहारी की...॥
जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा। स्मरन ते होत मोह भंगा बसी शिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच, चरन छवि श्रीबनवारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ ॥ आरती कुंजबिहारी की...॥
चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू। चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद, टेर सुन दीन दुखारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ ॥ आरती कुंजबिहारी की...॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

About the Story/Aarti
यह आरती श्रीकृष्ण के मनोहर, करुणामय और दिव्य स्वरूप का स्तवन है। वृंदावन, गोप-गोपियों, मुरली, माला, मुकुट और गंगा जैसे प्रतीक इसमें कृष्ण-लीला, प्रेम, भक्ति और पवित्रता की अनुभूति कराते हैं। इस आरती का पाठ भक्तों के मन में श्रद्धा, शांति और आनंद का संचार करता है, और श्रीकृष्ण के सुंदर, मधुर तथा करुणामय स्वरूप का ध्यान कराता है।
Spiritual Benefits
आध्यात्मिक लाभ
इस आरती के पाठ या श्रवण से मिलने वाले लाभ और भावार्थ:
- मन में भक्ति और प्रेम की वृद्धि
- श्रीकृष्ण की कृपा और संरक्षण की अनुभूति
- नकारात्मक विचारों और चिंता में कमी
- मन को शांति, मधुरता और संतुलन प्राप्त होना
- वृंदावन-लीला और कृष्ण-चेतना का स्मरण
- परिवार और घर के वातावरण में पवित्रता का संचार
Author's Note
यह भक्तिमय सामग्री श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा और प्रेरणा के उद्देश्य से तैयार की गई है। अधिक दिव्य चित्रों, आरती और कथाओं के लिए godsphoto.com पर अवश्य जाएँ।
Frequently Asked Questions
1. Aarti Kunj Bihari ki kis Bhagwan ke liye gayi jati hai?
Yeh aarti Shri Krishna, khaaskar Shri Giridhar Kunj Bihari Murari ke liye gayi jati hai. Isme unke divya roop, leela aur karुणा ka varnन hai.
2. Aarti Kunj Bihari ki padhne se kya labh hote hain?
Is aarti ke paath se man mein bhakti, prem aur shanti badhti hai. Saath hi negative thoughts kam hote hain aur Krishna ki कृपा ka anubhav hota hai.
3. Aarti Kunj Bihari ki mein kaun-kaun se symbols ka zikr hai?
Is aarti mein baansuri, vaijayanti mala, mor mukut, gagan, Ganga aur Vrindavan jaise symbols aate hain. Yeh sab Shri Krishna ki madhur, pavitra aur leela-mayee leela ko darshate hain.
4. Aarti Kunj Bihari ki ka path kab karna chahiye?
Iska path subah ya shaam ke pooja samay mein karna shubh mana jata hai. Vaise ise kisi bhi samay shraddha aur dhyan ke saath padha ja sakta hai.
5. Kya Aarti Kunj Bihari ki ghar mein padh sakte hain?
Haan, ise ghar mein padhna bahut shubh mana jata hai. Isse ghar ke mahol mein pavitrata, shanti aur bhakti ka sanchaar hota hai.
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