Highlights
- श्री राम स्तुति के मूल पद
- About the Story/Aarti
- Spiritual Benefits
- Author's Note

श्री राम चंद्र जी की आरती | Shri Ram Stuti Lyrics in Hindi
By Harshita Saini
Published: May 12, 2026
श्री राम स्तुति हिंदू भक्ति साहित्य की एक अत्यंत पवित्र रचना है, जिसे गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रीराम के दिव्य स्वरूप, मर्यादा, करुणा और पराक्रम का सुंदर वर्णन करते हुए रचा है। यह स्तुति केवल पाठ नहीं, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और आत्मिक शांति का मार्ग है। इसके प्रत्येक पद में प्रभु श्रीराम के अनुपम गुणों और भक्त के हृदय की विनम्र प्रार्थना का भाव समाया हुआ है।
"श्री राम चंद्र कृपालु भजमन" से आरंभ होने वाली यह रचना भक्त के मन को श्रीराम के चरणों में स्थिर करती है। इसमें श्रीराम को करुणा के सागर, भवसागर से तारने वाले, सुंदर नेत्रों वाले, कमल-सम मुख वाले और रघुकुल के गौरव के रूप में स्मरण किया गया है। यह भक्ति भाव मनुष्य को अहंकार, भय और भ्रम से मुक्त कर, सच्चे धर्म और प्रेम की ओर ले जाती है।
इस स्तुति में केवल श्रीराम का रूप-वर्णन ही नहीं, बल्कि भक्त की भावना भी प्रकट होती है कि प्रभु उसके हृदय-कमल में निवास करें और काम, क्रोध, लोभ जैसे विकारों का नाश करें। तुलसीदास जी की भाषा सरल, मधुर और गहन है, जो हर युग के भक्त को सीधे हृदय से जोड़ देती है। यही कारण है कि यह स्तुति आज भी घर-घर में श्रद्धा से गाई जाती है।
गौरी, शिव, शेष और मुनियों द्वारा श्रीराम की महिमा का गुणगान इस रचना को और भी दिव्य बनाता है। यह बताता है कि प्रभु श्रीराम केवल अयोध्या के राजा नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के पालनकर्ता हैं। सीता माता के साथ उनके सौम्य, मंगलमय और आदर्श स्वरूप का स्मरण भक्तों में प्रेम, संयम और नैतिकता की भावना को जाग्रत करता है।
जब भक्त इस स्तुति का पाठ करता है, तो मन में एक विशेष शांति और विश्वास का संचार होता है। श्रीराम की कृपा से जीवन के दुख, भय और बाधाएँ धीरे-धीरे कम होने लगती हैं और भीतर भक्ति, धैर्य तथा सकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है।
श्री राम स्तुति के मूल पद
श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम्। नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।। कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्। पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।। भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्। रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।। सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं। आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।। इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्। मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।। मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों। करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।। एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली। तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।। दोहा- जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि। मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।

About the Story/Aarti
श्री राम स्तुति का संबंध तुलसीदास जी की भक्ति परंपरा से है, जिसमें श्रीराम को धर्म, करुणा और मर्यादा का सर्वोच्च स्वरूप माना गया है। यह रचना भक्त के मन में राम-नाम की महिमा स्थापित करती है और बताती है कि सच्ची भक्ति बाहरी आडंबर से नहीं, बल्कि हृदय की पवित्रता से प्रकट होती है। इस स्तुति का पाठ विशेष रूप से रामनवमी, सुंदरकांड पाठ, और दैनिक पूजा में किया जाता है।
Spiritual Benefits
आध्यात्मिक लाभ
श्री राम स्तुति का श्रद्धा से पाठ करने पर अनेक मानसिक और आध्यात्मिक लाभ माने जाते हैं।
- मन को शांति और स्थिरता मिलती है
- भय और नकारात्मक विचारों में कमी आती है
- श्रीराम के प्रति भक्ति और समर्पण बढ़ता है
- जीवन में मर्यादा, संयम और सदाचार की प्रेरणा मिलती है
- घर में सकारात्मक ऊर्जा और मंगल भाव बना रहता है
- संकटों में धैर्य और आत्मविश्वास विकसित होता है
Author's Note
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Frequently Asked Questions
1. Shri Ram Stuti ka paath kab karna sabse shubh hota hai?
Shri Ram Stuti ka paath subah snan ke baad ya shaam ki aarti ke samay karna shubh mana jata hai. Ramnavmi, Sundarkand paath aur daily puja mein bhi iska vishesh mahatva hai.
2. Shri Ram Stuti padhne se kya benefits milte hain?
Iska paath man ko shanti, sthirata aur positive energy deta hai. Saath hi bhay, negative thoughts aur bechaini kam hoti hai aur bhakti bhavna badhti hai.
3. Shri Ram Stuti kisne likhi thi?
Shri Ram Stuti ko Goswami Tulsidas ji ne likha tha. Unhone isme Shri Ram ke karuna, maryada aur divya स्वरूप ka सुंदर वर्णन kiya hai.
4. Shri Ram Stuti ka sabse pehla shlok kaun sa hai?
Shri Ram Stuti ka prarambh “Shri Ram Chandra Kripalu Bhajman, Haran Bhav Bhay Darunam” se hota hai. Yeh shlok bhakt ko Shri Ram ke charanon se judne ki prerna deta hai.
5. Kya Shri Ram Stuti roz padh sakte hain?
Haan, Shri Ram Stuti roz padhna bilkul shubh maana jata hai. Isse man mein shaanti, dhairya aur sahi jeevan-marg par chalne ki prerna milti hai.
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