Highlights
- About the Story/Aarti
- Spiritual Benefits
- Author's Note

श्री गणेश जी की आरती | Ganesh Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi
By Aaradhya Sharma
Published: May 11, 2026
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी, माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा, लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया, बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी, कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
भगवान गणेश की जय, पार्वती के लल्ला की जय, ओम गं गणपतये नमः
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गणेशजी की आरती के बाद करें गणेश वंदना :-
वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि, मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ।
गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम् । उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम् ।

About the Story/Aarti
श्री गणेश जी की यह आरती भक्तिभाव, मंगलकामना और विघ्नों के नाश का प्रतीक मानी जाती है। गणपति बप्पा को प्रथम पूज्य देवता कहा गया है, इसलिए किसी भी शुभ कार्य, पूजा, व्रत या आरंभ के पहले उनकी आराधना की जाती है। इस आरती में उनके दयालु स्वरूप, माता पार्वती के पुत्र होने, और भक्तों के कष्ट दूर करने वाली महिमा का सुंदर वर्णन मिलता है। अंत में की गई गणेश वंदना से साधक का मन एकाग्र होता है और पूजा का वातावरण पवित्र बनता है।
Spiritual Benefits
आरती और वंदना के आध्यात्मिक लाभ
श्रद्धा से इस आरती और गणेश वंदना का पाठ करने से कई दिव्य लाभ माने जाते हैं:
- विघ्न और बाधाओं के निवारण में सहायता
- मन में सकारात्मकता और एकाग्रता बढ़ती है
- नए कार्यों में शुभता और सफलता का भाव मिलता है
- परिवार में शांति, समृद्धि और मंगल का अनुभव होता है
- भक्त में विनम्रता, श्रद्धा और सेवा-भाव का विकास होता है
- आरंभ किए गए कार्यों में श्री गणेश की कृपा का आशीर्वाद माना जाता है
Author's Note
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Frequently Asked Questions
1. Ganesh Ji Ki Aarti kab padhni chahiye?
Ganesh Ji Ki Aarti kisi bhi शुभ कार्य, पूजा, व्रत ya naye kaam ki shuruaat se pehle padhna sabse shubh mana jata hai. Isse man shant hota hai aur Bhagwan Ganesh ki kripa ka ahsas hota hai.
2. Ganesh Ji Ki Aarti padhne ke kya fayde hain?
Is Aarti ke paath se विघ्न aur obstacles door hone ki manyata hai. Saath hi man mein positivity, focus, aur ghar mein shanti aur samridhi ka bhav badhta hai.
3. Ganesh Vandana Aarti ke baad kyun ki jaati hai?
Ganesh Aarti ke baad Vandana karne se bhakti aur bhi gahri ho jaati hai. Yeh dhyan ko ekagra karti hai aur pooja ke mahaul ko aur pavitra bana deti hai.
4. Ganesh Ji ko kaun sa bhog sabse priya hai?
Ganesh Ji ko laddoo ka bhog bahut priya mana jata hai. Iske saath paan, phal aur mewa bhi arpan kiya jata hai.
5. Ganesh Ji ki Aarti mein unka kaun sa roop bataya gaya hai?
Is Aarti mein unhe dayalu, char-bhuja dhari, sindoor se shobhit aur mooshak savari wale roop mein bataya gaya hai. Yeh roop unki karuna aur vighna-harta swaroop ko darshata hai.
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