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- About the Story/Aarti
- Spiritual Benefits

विष्णु भगवान की आरती: ॐ जय जगदीश हरे
By Harshita Saini
Published: May 16, 2026
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्तजनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का। सुख-समृद्धि घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूँ मैं जिसकी॥
तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता। मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
विष्णु भगवान की जय, नारायण की जय। लक्ष्मीपति की जय, श्री हरि की जय॥
भगवान विष्णु हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं, जिन्हें संसार के पालनहार और रक्षक के रूप में पूजा जाता है। वे त्रिदेवों में “पालनकर्ता” माने जाते हैं और धर्म की रक्षा के लिए समय-समय पर विभिन्न अवतार धारण करते हैं। श्रीराम, श्रीकृष्ण, नरसिंह और वामन जैसे उनके अवतार भक्तों के लिए आस्था और प्रेरणा का स्रोत हैं। भगवान विष्णु को शांति, करुणा और संतुलन का प्रतीक माना जाता है। उनके हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म दिव्य शक्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। विष्णु भगवान की भक्ति करने से जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग पर विराजमान रहते हैं और माता लक्ष्मी सदैव उनके साथ रहती हैं। वे अपने भक्तों के सभी दुखों को दूर कर उन्हें सही मार्ग दिखाते हैं। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। विष्णु भगवान की आरती और पूजा से घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-शांति का वास होता है। एकादशी व्रत और विष्णु सहस्रनाम का पाठ विशेष रूप से उनकी कृपा पाने के लिए किया जाता है। सच्चे मन से भगवान विष्णु का स्मरण करने पर जीवन में सफलता और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
About the Story/Aarti
'ॐ जय जगदीश हरे' हिंदू परंपरा की सबसे प्रिय और व्यापक रूप से गाई जाने वाली आरतियों में से एक है। यह आरती भगवान विष्णु और उनके स्वरूप श्री हरि नारायण की स्तुति में गाई जाती है। इसमें ईश्वर को पालनकर्ता, संकटहर्ता और करुणा के सागर के रूप में स्मरण किया गया है। भक्ति, शरणागति और कृतज्ञता की भावना इस आरती का मूल संदेश है।
Spiritual Benefits
इस आरती के आध्यात्मिक लाभ
नियमित रूप से इस आरती का पाठ और गायन मन, जीवन और भक्ति-भाव को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।
- मन को शांति और स्थिरता मिलती है
- संकटों में धैर्य और साहस बढ़ता है
- घर में सकारात्मक ऊर्जा और भक्ति का वातावरण बनता है
- भगवान विष्णु की कृपा और संरक्षण का भाव मजबूत होता है
- मनुष्य में कृतज्ञता, विनम्रता और समर्पण की भावना विकसित होती है

यह devotional content श्रद्धा और भक्ति-भाव से प्रस्तुत किया गया है। अधिक दिव्य चित्रों, कथाओं और आरतियों के लिए godsphoto.com पर अवश्य जाएँ।
Frequently Asked Questions
1. "ॐ जय जगदीश हरे" आरती किस भगवान की है?
यह आरती भगवान विष्णु, श्री हरि नारायण और जगदीश्वर की स्तुति में गाई जाती है। इसमें उन्हें पालनकर्ता, संकटहर्ता और करुणा के सागर के रूप में स्मरण किया गया है।
2. विष्णु भगवान की आरती "ॐ जय जगदीश हरे" कब गानी चाहिए?
इसे सुबह-शाम पूजा के समय, खासकर आरती के दौरान गाया जाता है। कई लोग इसे घर में सकारात्मक ऊर्जा और भक्ति-भाव बढ़ाने के लिए रोज़ भी पढ़ते हैं।
3. "ॐ जय जगदीश हरे" आरती पढ़ने से क्या लाभ होते हैं?
मान्यता है कि इससे मन को शांति मिलती है और संकटों में धैर्य बढ़ता है। साथ ही घर का वातावरण पवित्र, सकारात्मक और भक्तिमय बनता है।
4. इस आरती का मुख्य संदेश क्या है?
इस आरती का मुख्य संदेश भक्ति, शरणागति और कृतज्ञता है। यह सिखाती है कि ईश्वर ही सच्चे पालनकर्ता और दुख हरने वाले हैं।
5. क्या "ॐ जय जगदीश हरे" आरती घर में रोज़ गा सकते हैं?
हाँ, इसे घर में रोज़ गाना बहुत शुभ माना जाता है। इससे मन स्थिर रहता है और भगवान विष्णु की कृपा का भाव मजबूत होता है।
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